आज मानव अधिकार दिन की बात दुनिया भर में हो रही हे। आखिर सोचना तो ऐ हे की एसे कितने लोग हे इस देश में जो अपने अधिकारों के लिए जाग्रत हे। देश में सामान्य नागरिक को भुलाया जा रहा हे जेसे उसका कोई अस्तीत्व ही ना हो। गरीब और कमजोर इन्सान मजाक बनता जा रहा हे। न तो वो कुच बोल सकता हे की न तो वो अपना द्र्स्टीकोण समाज के सामने रख सकता हे। ऐ वो वर्ग हे जिस पर हो सके उतने जुल्म वो लोग करते हे जो अपने आप को आधुनिकता का हिस्सा मानते हे। कही दलित के नाम पर कही कोम के नाम पर तो कही सरकारी दफ्तरों में सामान्य लोग अक्षर भोग बनते रहते हे। जिसे हम कोमन मेन कहते हे उसे हमें प्राधान्य देना पड़ेगा और खुदके अधिकारों के लिए लड़ सके एसा जुनून भी। आज हम जान मुजकर एक एसा पुरूष प्रधान समाज बनाने जा रहे हे की जहा ओरतो को उनके जन्म से पहले ही मार दिया जाता हे। अधिकार देने की बात तो दूर रही पर उनका क्या जिस को जन्म देने से पहले ही उनके अधिकार छीन लिए जाते हे। अपने देश में आज भी कितने ही एसे मजदुर हे जिनको नशा करके सुरंग में काम करने के लिए उतरना पड़ता हे। नमक उत्पादक करने वाले अगरिया लोग जो नमक में काम करने के कारन ज्यादा से ज्यादा बिमारीयों के भोग बनते हे। भारत के कितने ही गावोँ में आज भी दलितों को मंदिरों में नही प्रवेश दिया जाता। तब सवाल होता हे की इस सब जगाओ पर कब मानव अधिकार लागु होगा। मानव अधिकार पर काम करने वाली संस्था का नाम हे ''एमनेस्टी आंतर राष्ट्रीय'' जिन के स्थापक थे पीटर बेनेन्सन। जिन्होंने समग्र मानवों के अधिकारों के बारे सोचा ही नही पर सब अपने अधिकारों को मांग सके इतनी हीमत भी दी। ईन सस्था को १९७७ शांति के लिए नोबेल पारीतोषिक एनायत किया गया। एमनेस्टी सस्था का प्रतीक हे''नौकेले कांटो से चिपकी हुई जलती मुम्बती'' पीटर का एक प्रिय वाक्य था की ''अंधकार को कोशने के बजाय एक दीप जलवों''
Thursday, December 10, 2009
Tuesday, December 1, 2009
| कमला देवी |
गुजरात के नए गवर्नर श्री कमला देवी गुजरात विद्यापीठ की मुलाकात पर आए थे। वो राजस्तान की रहने वाली हे। उनके हाथो काका कालेलकर की वेबसाईड लोंच की गई। वो कही सालो से राजनीती में काम कर रही हे पर उनकी कारकिदी पर कभी कोई दाग नही लगा। गुजरात विधापीठ के सभाखंड में आयोजित इस कार्यकम में वो बोलने में खिल उठे थे। उन्हों ने अपनी उन्गली विद्याथीओ की और करके बोला की में भी यही कही बेठती थी। सभाखंड में बेठे विद्याथीओ को देखकर उन्हों ने अपने बचपन के दिनों की याद आईथी। वो कहरहे थे की हमारे ज़माने में पढ़ाइ करना गुना था मेरे बापूजी ने मुजे पढ़ाइ करने भेजा तो मेरे बापूजी को समाज से बाहर करदिया था। पर बापूजी उनलोकोकी बातो में न आए। वो कह रही थी की हमने पढ़ाइ के साथ खेल कूद में भी बहोत भाग लीया अपने प्रवचन के बाद कमला देवी ने गुजरात विद्यापीठ की भूमि को चूम लिया था और बादमे वो बोले थे की में बहोत भाग्यवान हु की गाँधीजी की इस पवित्र भूमि में आने का अवसर मिला। वो विद्यापीठ से इतनी प्रभावित् हुई की वो बोल उठी की विद्यापीठ में आज भी गांधीजी मोजुद हो ऐसा लग रहा हे। उन्हों ने राजनीती पर बड़ा कटाक्ष करते हुए बोला की '' लोग बोलते हे की राजनीती में सबकुच चलता हे पर एसा नही हे क्युकी ढेर सारे लोगो के प्रतिनिधि बनकर आप आते हो तो अपने जाहेर जीवन के दरमियान कोई दाग नही लगना चाहिए '' श्री कमला देवी ने अध्यापक और विद्याथी से रूबरू मुलाकात भी की थी एवम बच्चो को ओटोग्राफ लिख दिया था। गुजरात विद्यापीठ के ग्रनथालय की मुलाकात करके काका साहब के किताबो को भी देखा था। सही में कमला देवी सादगी के रूपमें गांधीजी के विचारो को मानने वाली गवर्नर गुजरात को मिली हे।