एक वक़्त था की इस देश के युवा राजीव दीक्षित को अपना हीरो माना करते थे1 वो जहा भी जाते थे वहा युवाओ से घेरे रहेते थे1 क्युकी युवा राजीव में अपना लीडर देखते थे1 और वो बात में कोई शक नही की उनके भाषण सुनने के लिए लोको के मेले जमते थे1 उन्होंने स्वदेशी अभियान बड़े जोर से चलाया सिर्फ चलाया ही नही अच्छे-खासे लोक जुड़े और उस अभियान को काफी बड़ा रूप मिला1 मुझे याद हे की में ग्यारवी कक्षा में पढता था तब मेरे ग़ाव में किसी जगा पर मेने उनकी ऑडियो केसेट पहेली बार सुनी और वो केसेट में राजीवजी की आत्म विश्वास से भरी बाते आज भी याद हे1 सच कहू तो तब से में उनको आदर्श के रूप में देखता आया हु 1बहोत अफ़सोस हे उनकी देहांत सुन के 1हर एक चीज का वो विरोध करते थे जो चीज विदेश से बनकर आती थी वो जानते थे की विदेशी प्रोड़क कितनी सहेलाई से इस देश की चीजो को खत्म कर रही हे1 उन्होंने कभी अपने आप को एक आज़ाद राष्ट्र का नागरिक नही माना वो देश को विदेशी कानून और विदेशी कंपनियों का गुलाम आज भी मानते थे1 उसके आलावा भी उन्होंने राजकारण पर भी जमकर प्रहार किये थे उन्होंने कहा था की सदियों पहेले एक मीर जाफर था जिसने इस देश को कितने ही सालो की गुलामी की और धकेल दिया जहा आज तो हर घर में मीर जाफर पैदा हो रहा हे1 जब सच कहे तो उनकी ऐ सची जुबान के कारन वो बहोत बार परेसान भी हुए हे1 जब हर मुसीबत में बंदा बड़ा निर्भय होकर निकला हे जबकि हर मुशीबत को लिपटते वो आगे चेलते रहे1 वो आज इतने आगे चले गए हे की वहासे लोटकर वापिस नही आसकते ऐ बड़े दुःख की बात तो हे इ पर उस से भी बड़े दुःख की बात ऐ हे की उनके मोत की नोध किसी एक माध्यम ने भी नही ली1 इस से बड़ा इस देशमें दंभी व्यवस्था का और क्या सबूत हो सकता हे1
Wednesday, December 22, 2010
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