| मुलाकात |
एक दिन की बात हे। जब में अमदाबाद की सडको पर लटार मारने निकला था। में अपने आप के साथ अपनी मस्ती में चल रहा था। तभी मेरी नजर रस्ते पर बेठे एक भिखारी पर पड़ी। पहली नजर से मुजे उसमे कुछ रस जगा। उसके पास गया तो अजीब सी बदबू आ रही थी। वो अपने दो हाथो को जकड कर आसमान के तारो की और देखकर बेठा था। पास में भीख मागने की कटोरी भी पड़ी थी पर वो खाली थी। में उसके पास जाकर बेठा और उसने मेरी और देखा भी नही। मेने उसको सवाल किया की हररोज के कितने पैसे मिलते हे। उसने कटोरी की और नजर डालके बोला ,बहोत कम। वो दिखने में बड़ा तनदूरस्त था तो मेने बोल दिया की नोकरी करोगे। फ़िर उसको मेरी बात पर रस जगा। मरी और कोनसी नोकरी दिलाओगे। में बोलू उस पहले तो लाल लाईटों वाला गाडियों का काफला उस रस्ते से ही निकला जहा हम बेठे थे। मुजे मजाक सूजी और मेने उस आदमी को फ़िर एक सवाल कर दिया। मेने बोला ऐ गाडियों में कोनसा नेता निकला। वो मेरी और देखकर मुश्कुराया और बोला ''वो तो अपना मोहन था'' और में सुनकर चकर खा गया। और वो हकीकत भी थी की मनमोहन सिंह वो दिनों अमदाबाद की मुलाकात पर आए थे। मेरा उस भिखारी को देखने का नजरिया बदल गया।
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